Don’t easly available for People

Don’t be easily available for people. They will surely take you for granted. Keep busy yourself with whatever you have. We can’t ask someone to create a space in their life for us. If you are truly worthy. You will surely have space in their life.

Ashish Rasila

Every day is a Women’s Day

Women’s beauty has a great role in human life. Most of the Songs, Gazals, Poems, Shayari are based on women’s luster and glory. If there is something, which can baffle nature’s magnificent beauty in this entire world. Then there is only a women’s handsomeness which can baffle the beauty of nature You can compare her elegant charm with the moon, wind, rivers, ocean, vegetation, and more. I think, there is nothing which I cannot be comparable with her illustrious beauty. I am quite confident that, without women, y’all will never become a romantic poet, thyself can’t write every single poem on the beauty of nature. Even the great poet ‘ William Shakespeare’ also wrote poems with a comparison of nature. I believe the existence of beauty to us is given by women. Without her, we will never know, what beauty is the beauty. I am greatly thankful to all beautiful women!

Ashish Rasila

मेरी ख़ामोशी का जवाब

मेरी ख़ामोशी का जवाब उसने भी ख़ामोशी से दिया,
पहली बार किसी को इतनी बेरहमी से लड़ते देखा।

आशीष रसीला

Dear Fond !

Dear Fond…..!
It was not your beauty, which makes me to fallen love with you. I  have seen many women before you. I never felt the same way I felt about you. Trust me, I don’t have reason to be in love with you. It just, I feel like, I am the luckiest person in the world when you are around me. When I look at you, I just smile, without knowing, why I am smiling.  I can listen to your all-funny floccinaucinihilipilification and sometimes too deep talk my entire life. And the reason behind that, I don’t know. When  I said, I don’t know, it does not mean, I don’t know anything about you. Yes. I know, everything about you but I just want to say that, don’t be afraid. If they don’t accept your dark then they are not worthy of your light.
***Ashish Rasila***

Ashish Rasila

मेरे हर शेर को सुनकर अच्छा ना कह

वो खुदा  का  बनाया इंसान है  उसे खुदा  ना  कह ,
जो हजारों मंदिरों-मस्जिदों में रहे उस खुदा ना कह..

सिर्फ  इंसान की  इंसानियत  उसे  इंसान  बनाती है ,
इंसानियत  नहीं  हो  जिसमें  उसे  इंसान  ना  कह..

हर  ग़ज़ल  मेरी  वारदात  है  जो   हम   पर   गुजरी ,
मेरे   हर    शेर   को   सुनकर   उसे  अच्छा   ना   कह..

इस  दो  दिन  की  जिंदगी  ने  होश  उड़ा  डालें  हैं,
अब कुछ और दो  दिन  जीने को  अच्छा  ना  कह..

बात सिर्फ  एक  बोसे  की  होती  तो   बेहतर  होता,
जिस्मानी तिश्नगी में तड़पते दिल को मुहब्बत ना कह..

मैं बहुत रोया अपनी  बेवफ़ाई  की  माफ़ी  मांग कर,
तुमने माफ़  ना  किया  तो   खुदको अच्छा  ना  कह..

इन  अंधेरों  की  पीठ  पर  उजाले आराम करते  हैं ,
शायर  हर  बात पर  अंधेरों को  यूं  मुज़िर  ना  कह..

आशीष रसीला

Ashish Rasila

जिंदगी तवायफ़ सी लगी

गम अपनों सा खुशियां अपनी होकर भी पराई सी लगी ,
हमें सादा जिंदगी बेहतर, बाकी सब मोह माया सी लगी।

तूफान के बाद  एक टूटे हुए  हरे दरख़्त  ने  मुझसे  कहा ,
उसका यूं तुफां में गिरना उसे खुदा की एक साजिश लगी।

हर जगह झूठ,खुला कत्लेआम ये दुनिया जहन्नुम लगती है ,
मगर एक  बच्चे  को हंसता  देखा  तो दुनियां अच्छी लगी।

यूं तो हमको  हमारा  दुश्मन   ज़रा  भी  पसंद  नहीं,  मगर
वो मुझसे बेहतर बनना चाहता है ये बात हमको अच्छी लगी।

अब  इससे  बड़ा रोज़गार  हमको कहां मिल  सकता था,
हमारी ज़िदंगी के यहां जिंदगी जीने के लिए नौकरी लगी।

आप  हमसे  से  ना  ही  पूछिए  तो  बेहतर  होगा  साहब ,
हमको तो मौत जीवन साथी  ज़िन्दगी  तवायफ सी  लगी ।।

आशीष रसीला

Ashish Rasila

ख़्वाब कहते है

मेरे ख़्वाब कहते हैं घर से दूर निकल जाने को,
घर की यादें कहती हैं  घर वापिस लौट आने को..
मंज़िलें कहती है कुछ कदम और चलता रह,
मुश्किलें कहती हैं  रास्ते में ही सिमट जाने को..

आशीष रसीला

हम जवाब क्या देते

हम उसको अपनी मुहब्बत का हिसाब क्या देते,
जवाब खुद ही सवाल पूछे तो हम ज़वाब क्या देते…

एक मासूम बच्चे ने तितली के पंखों को नोच डाला,
अब उसकी नादानी का हम उसको सिला क्या देते…

पहली बार आंखो ने सच को झूठ बोलते देखा,
अब हम अपनी बेगुनाही का सबूत क्या देते….

जिस शख्स की चाहत में हमने दुवाएं मांगी हों,
अब उसकी बेवफाई में हम उसे  बद्दुआ क्या देते…

जो कुछ दूर तक अपनी जुबां पर ना चल सके,
ऐसे अपाहिज को हम अपना सहारा क्या देते…

जो समंदर सारी नदियां पी कर भी प्यासा हो,
उसकी प्यास में आंख का एक आंसू क्या देते …

तुफान में जख्मी होकर एक परिंदा जमी पर गिरा,
हम खुद टूटकर बिखरे थे तो हौंसला क्या देते…

कुछ रास्तों के बारे वो हमसे अक्सर पूछते थे,
जिन रास्तों पर गए नहीं तो मशवरा क्या देते …

मौत मेरे घर की दहलीज पर मेरे इंतजार में थी,
अब हम अपनी जान ना देते तो भला क्या देते…

आशीष रसीला