सूरज को बुझा देता है

हर शाम कोई सूरज को  बुझा देता है,
इन जुगनुओं में कोई आग लगा देता है ।

मैं कुछ दिनों से उस शख़्स कि तलाश में हूं,
जो हर शाम आसमान को काली चादर ओढ़ा देता है ।

ये बादल काली घटाओं सा जब छा जाए ,
तो आसमान की छत में टपका लगा देता है ।

तारीकीयां उजालों से नहीं उलझ सकती ,
एक चिराग़ अंधेरों को ओकात में ला देता है ।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.