सब कुछ आपका है

आसमान का सपना देखने वालों ,
इस जमीं का ज़िम्मा आपका है ।

बुझाकर दिया, अंधेरा देखा,
अब रोशनी का जिम्मा, आपका है ।

दर्द पर लतीफे पढ़ने वालों ,
अगला पन्ना, आपका है।

बारिश के तूफान में ओले पड़े,
खेत खलिहान, किसान का है ।

बची धान सरकारें खाएं,
सड़क पर किसान, आपका है ।

शहर की आग के पीछे तेज हवा,
अब अगला गांव, आपका है।

मैं बिखरा, तो वो टूटा ,
आगे उनसे रिश्ता, आपका है ।

पेड़ कटा, हवा जहरली हुई,
ये कुदरत का तोहफा, आपका है

कुछ चले गए, कुछ जाने वाले हैं,
अब सिर्फ इतंजार, आपका है ।।
*** आशीष रसीला***

Ashish Rasila

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