सब कुछ आपका है

आसमान का सपना देखने वालों ,
इस जमीं का ज़िम्मा आपका है ।

बुझाकर दिया, अंधेरा देखा,
अब रोशनी का जिम्मा, आपका है ।

दर्द पर लतीफे पढ़ने वालों ,
अगला पन्ना, आपका है।

बारिश के तूफान में ओले पड़े,
खेत खलिहान, किसान का है ।

बची धान सरकारें खाएं,
सड़क पर किसान, आपका है ।

शहर की आग के पीछे तेज हवा,
अब अगला गांव, आपका है।

मैं बिखरा, तो वो टूटा ,
आगे उनसे रिश्ता, आपका है ।

पेड़ कटा, हवा जहरली हुई,
ये कुदरत का तोहफा, आपका है

कुछ चले गए, कुछ जाने वाले हैं,
अब सिर्फ इतंजार, आपका है ।।
*** आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मेरा मक़सद नहीं

खुद को किसी से बेहतर कहना मेरा मक़सद नहीं,
किसी का दिल दुखा कर खुश रहना मेरा मक़सद नहीं।

मैं जो भी था,  मैं जो भी हूं , मैं जो भी होने वाला हूं ,
अपने हालों पर किसी को मुजरिम बनाना मेरा मक़सद नहीं।

मुझ से अनजाने में किसी का दिल भी टूट सकता है ,
मगर मैं पलट कर माफ़ी ना मांगू, मेरा मक़सद नहीं ।

कुछ टूटे हैं मुझ से रिश्ते, कुछ लोगों ने मुझ से तोड़े हैं,
मगर रिश्तों के टूटने से मैं ख़ुद टूट जाऊं, मेरा मक़सद नहीं ।

मैं  किसी के ऐब गिनाता फिरूं ये मेरी ज़हनियत नहीं है ,
अपने दुश्मन को भी बुरा कहना, मेरा मक़सद नहीं ।

झुक जाए सर मेरे एहतराम में, ऐसी शोहरत का मोहताज नही,
किसी का सर झुका कर उसे गले लगाना, मेरा मक़सद नहीं।

किसी के सपनों पर मैं अपने सपनों की नीव नही रख सकता,
किसी को हरा कर जितने की मुराद रखना, मेरा मक़सद नहीं।

ये दुनियां एक दुनियां है मेरी दुनियां तो कहीं और है ,
ख्वाबों की दुनियां में हकीकत को भूल जाना, मेरा मक़सद नहीं।

मेरा गलत होना या सही होना तुम्हारे नजरिए से है,
किसी के कहने पर मैं बदल जाऊं, मेरा मक़सद नहीं ।

खुदा है तो खुदा होगा, मुझे उसके होने पर ऐतराज नहीं,
खुदा के नाम पर मैं मिट जाऊं ऐसा सोचना, मेरा मक़सद नहीं ।

मुनासिफ है की कल बुलंदियों का मैं आसमान चुमूं ,
मगर मैं अपनी ओकाद भूल जाऊं, मेरा मक़सद नहीं ।

इस दुनियां में रहने वाले हम सभी किरायेदार  हैं ,
मैं जैसे आया था, वैसे ही लौट जाऊं, मेरा मक़सद नहीं ।

मैंने बहुत सोच समझ कर ये अपनी बातें रखी हैं  ,
लोग अपने दिल पर ना लगा बैठें, मेरा मक़सद  नहीं ।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

जो कभी हमें अच्छा कहते थे

जो कभी हमें अच्छा कहते थे , वो अब हमें बुरा कहने लगें हैं,
जो हमें समझा करते थे, वो अब हमें से जानने लगें हैं ।
मुझे जिनके इंसान होने पर भी ताज्जुब हुआ करता था,
अजीब बात है वे लोग अब खुद को खुदा कहने लगें हैं ।।

***आशीष रसीला***

एक शख्स की चाहत

ऐ - खुदा माना  के दुनिया में हर चीज नहीं मिलती,
मगर हर चीज को तो मांगा भी नही हमने ।
तेरी इतनी बड़ी दुनिया में सिर्फ एक शख्स की चाहत,
उसी को छोड़ कर क्यूं सब कुछ दिया तुमने ?
***आशीष रसीला***
Ashish Rasila

सूरज को बुझा देता है

हर शाम कोई सूरज को  बुझा देता है,
इन जुगनुओं में कोई आग लगा देता है ।

मैं कुछ दिनों से उस शख़्स कि तलाश में हूं,
जो हर शाम आसमान को काली चादर ओढ़ा देता है ।

ये बादल काली घटाओं सा जब छा जाए ,
तो आसमान की छत में टपका लगा देता है ।

तारीकीयां उजालों से नहीं उलझ सकती ,
एक चिराग़ अंधेरों को ओकात में ला देता है ।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

लगा कर सीने में आग

लगा कर सीने में आग वो धुवां बनकर बहता है ,
गुमशुदा बन उनके ख्यालों दिल कहीं खोया रहता है ।

उसने अपने हाथों से एक पाक रिश्ते को मार डाला,
ये ऐसा कत्ल है, की दिल सुली पर चड़ा रहता है ।

तन्हाइयों से भागता है , उसे ढूंढ़ता है हर जगह ,
दिल मानेना, हर जगह उसकी तलाश में रहता है।

लोग कहते हैं कि  ढूंढे तो खुदा मिल जाए ,
कोई बताए की बिछड़ा यार किस गली में रहता है ।

है इतना दर्द की बता नहीं सकता ,
रोए बिना ही आंखों से पानी टपकता रहता है ।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila